भारत ने दुनियां को गेहूं निर्यात रोकने का फैसला क्‍यों लिया।

भारत के तत्‍काल प्रभाव से गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है। विदेश व्‍यापार महानिदेशालय ने कहा है कि गेहूं के वैश्विक मूल्‍यों में आए अचानक उछाल के परिणामस्‍वरूप भारत, पड़ोसी तथा अन्‍य प्रभावित देशों के सामने खाद्य सुरक्षा का जोखिम उत्‍पन्‍न हो गया है और देश की खाद्य सुरक्षा का प्रबंधन करने और पड़ोसी देशों व अन्‍य प्रभावित देशों की सहायता के लिए सरकार गेहूं की निर्यात नीति संशोधन करती है।

Bharat genhu niryat

इससे पहले क्‍या थी भारत की पालिसी।

भारत ने पहले कहा था कि वह यूक्रेन पर हुए आक्रमण के कारण गेहूं आपूर्ति में आई कमी को पूरा करने में मदद करेगा। गेहूं के वैश्विक निर्यात में यूक्रेन 12 प्रतिशत का भागीदार है। भारत ने इस वित्तिय वर्ष में गेहूं के निर्यात को 70 लाख टन से बढ़ाकर 1 करोड़ टन करने की योजना बनाई थी।

निर्यात रोकने के कारण।

  • सरकार ने बढ़ती महंगाई काबू में करने और 1.4 अरब लोगों को खाद्य सुरक्षा देना मुख्‍य कारण बताए हैं। वाणिज्‍य सचिव बीवीआर सुब्रमण्‍यम ने कहा कि हालिया हफ्तों में देश के कुछ हिस्‍सों में गेहूं और आटे की कीमतों में 20 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
  • कुछ मिडिया रिर्पोटर्स के अनुसार, वैश्विक कीमतों में आई तेजी के कारण कुछ किसान, गेहुं सरकार को न देकर व्‍यापारियों को बेच रहे थे, जिससे सरकार अपने 20 मिलियन टन के बफर स्‍टॉक के लेकर चिंतित हो गई।

लू का प्रभाव।

भारत में इस समय मार्च का महीना 122 वर्षों में सर्वाधिक गर्म रहा। उतर पश्चिमी भारत में चलने वाली लू ने गेहूं की फसलों को प्रभावित किया। सरकार ने अनुमान लगाया कि 2021 में हुए गेहूं के 1,095.9 लाख टन उत्‍पादन से इस बार कम से कम 5 प्रतिशत की कमी आ सकती है।

वैश्विक प्रतिक्रिया।

जी7 देश कनाडा, फ्रांस, जर्मर्नी, इटली, जापान, यूके और अमेंरिका भारत के गेहूं निर्यात बंद करने के फैसले से नाखुश हैं। जर्मनी के कृषि मंत्री चेम आजदेमेर ने कहा, अगर कोइ निर्यात पर प्रतिबंध या बाजार सीमित करने लगेगा तो इससे संकट बढ़ेगा।

तारीख: 18/05/2022

लेखक: शत्रुंजय कुमार।

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