विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष।

दुनिया भर में हर साल 22 अप्रैल को वर्ल्ड अर्थ डे यानी विश्व पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन धरती को बेहतर बनाने और पर्यावरण बचाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है। एनवायरमेंट को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी हम सब की है। कुछ ऐसी सरल चीजें जिनका दैनिक जीवन में अभ्यास कर हम अपने आसपास बड़ा बदलाव ला सकते हैं। तथा अपने पर्यावरण को बचाने के लिए हम क्या कर सकते हैं आइए नीचे दिए गए बिंदुओं पर विचार करें और उसे अपनाएं।

Vishwa Prithvi Diwas

जन-जन को पर्यावरण बचाने के महत्व को बताएं। 

पर्यावरण बचाने से जुड़ी अपनी छोटी-बड़ी सभी जानकारियों को आगे बढ़ाएं। अपने दोस्तों, पड़ोसियों और सहकर्मियों से बात कर उन्हें प्राकृतिक संसाधनों का महत्व को बताएं और पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करें। अपनी बात ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का भी उपयोग कर सकते हैं। 

कचरे में कमी लाकर। 

कचरे को कम करके पर्यावरण को बचाने में एक बड़ी मदद की जा सकती है। बेकार हो गई चीजों में कुछ बदलाव कर दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है, जैसे पुराने टिन का इस्तेमाल गमले के रूप में किया जा सकता है या किसी खाली बोतल पर पेंट कर घर की सजावट की जा सकती है। इसी प्रकार बचे हुए भोजन से खेतों के लिए जैविक खाद बनाई जा सकती है। 

प्लास्टिक के उपयोग से बचें। 

बाजार में सामान खरीदने जाए तो घर से ही अपना कपड़े या जुट का थैला लेकर जाएं। प्लास्टिक बैग की जगह कपड़े के थैले का प्रयोग करें। अगर घर में प्लास्टिक बैग पहले से ही मौजूद है तो उसे फेंकने के बजाय दोबारा इस्तेमाल में लाएं। 

यात्रा। 

अपने दैनिक कार्यों के लिए हफ्ते में एक बार पैदल चलने की आदत डालें या साइकिल का इस्तेमाल करें। अगर संभव हो तो कार की जगह बाइक से यात्रा करें। पर्यावरण को बेहतर करने में योगदान देने के लिए कार पुलिंग के ऑप्शन पर विचार करें। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर अपने कार्बन पदचिन्ह को घटाएं। 

कागज का कम इस्तेमाल करें। 

पेपर बैंक का स्टेटमेंट की जगह ई स्टेटमेंट और पेपर टिकट के बजाय ई टिकट का चयन करें। पुरानी किताबों को रद्दी में बेचने के बजाय उन्हें दान करें। नोट्स और फाइलों को अपने कंप्यूटर या डिवाइस पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्टोर करें। पेपर नैपकिन या पेपर टॉवल के बजाय घर पर कपड़े के नैपकिन का प्रयोग करें। अखबारों को दोबारा इस्तेमाल करें। 

तारीख: 22/04/2022 

लेखक: शत्रुंजय कुमार। 

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