सीआरपीएफ शौर्य दिवस पर विशेष

9 अप्रैल को सीआरपीएफ (CRPF) शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है यह क्यों मनाया जाता है इसके बारे हमने निचे दिए गए लेख द्वारा विस्तार से बताने की पूरी कोशिश की है। 

CRPF Saurya Diwas

1965 का भारत पाकिस्तान युद्ध सीमा मुठभेड़ की पराकाष्ठा का समय था, जिसने भारत पाकिस्तान के बीच तनाव को बढ़ाया। पाकिस्तान ने सबसे पहले अप्रैल, 1965 में रन ऑफ कच्छ में संघर्ष की शुरुआत की थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इस युद्ध में भारी संख्या में टैंकों को तैनात किया गया था। 

क्या थे पाकिस्तान के मंसूबे। 

मार्च 1965 में पाकिस्तानी फौज ने रन ऑफ कच्छ में भारतीय सीमा से थोड़ी सी दूरी पर कंजरकोट में एक पोस्ट बना दी और हटाने से मना कर दिया। इसी महीने उसने डींग में दूसरी पोस्ट बना दी। भारत ने पाकिस्तान के मंसूबों को फेल करने के लिए कंजरकोट से करीब 4600 गज दक्षिण पश्चिम में ‘सरदार पोस्ट’ तथा डींग से तकरीबन 1000 गज पर ‘टाक पोस्ट’ की स्थापना की। 

भारत ने इस दोनों सीमा चौकियों ‘सरदार पोस्ट’ और ‘टाक पोस्ट’ पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की दूसरी बटालियन की चार कंपनियों को तैनात किया। 

9 अप्रैल। 

9 अप्रैल की सुबह 3:40 पर पाकिस्तानी सेना की 51 ब्रिगेड ने ‘सरदार पोस्ट’ पर हमला कर दिया। पाकिस्तानी सेना भारी मोटर और एमएमजी फायर के साथ लड़ रही थी। एक तरफ आधुनिक हथियारों से लैस पाकिस्तान पूरे 3500 सैनिक थे। और दूसरी तरफ सीआरपीएफ के चंद जवान। लेकिन भारतीय जवानों ने कम हथियार और गोला बारूद के बावजूद पाकिस्तान की पूरी ब्रिगेड को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। 

सीआरपीएफ के अनुसार, सैन्य लड़ाई के इतिहास में कभी भी एक छोटी सी सैन्य टुकड़ी इस तरह से एक पूर्ण पैदल सेना ब्रिगेड से नहीं लड़ी। 

12 घंटे तक चली लड़ाई। 

पाकिस्तानी फौजी रुक रुक कर हमला कर रही थी लेकिन सीआरपीएफ जवान मोर्चे पर डटे रहे। जवानों ने सूझबूझ और बहादुरी की मिसाल देते हुए पाकिस्तानी सेना को कैंप के पास तक नहीं फटकने दिया। शाम 5:00 बजे (लगभग 12 घंटे बाद) भारतीय सेना की टुकड़ियां आ पहुंची। 

अदम्य साहस और शौर्य का परिचय। 

इस हमले में सीआरपीएफ जवानों ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देते हुए 34 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और चार को जिंदा पकड़ा। हमले में पांच भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हुए। सीआरपीएफ इस शौर्य गाथा को याद कर हर साल 9 अप्रैल को शौर्य दिवस के रूप में मनाती हैं।

तारीख: 09/04/2022 

लेखक: राकेश कुमार।  

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